Greeting Message

मैं नागरिक अधिकार सुरक्षा परिषद संस्था को उसके 11वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित ‘पुलिस–जन संवाद दिवस’ जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम के लिए हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित करता हूं। मुझे ज्ञात हुआ है कि परिषद द्वारा नागरिक अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने, मानवाधिकारों के संरक्षण को सुदृढ़ करने तथा पुलिस और आम जनता के बीच विश्वास, सहयोग एवं संवाद को प्रोत्साहित करने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, जो अत्यंत सराहनीय है। इसी क्रम में ‘पुलिस–जन संवाद दिवस’ जैसी पहल पुलिस और आम जनमानस के बीच आपसी समझ, विश्वास और सहयोग को और अधिक मजबूत करने में सहायक सिद्ध होगी। यह कार्यक्रम मानवाधिकार संरक्षण, अपराध रोकथाम तथा सुरक्षाहित एवं संवेदनशीलता के निर्माण में पुलिस और नागरिकों की साझा भूमिका को रेखांकित करेगा। यह निश्चित रूप से एक सराहनीय प्रयास है।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार पुलिस सुधारों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पुलिस व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। इस क्रम में भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA); यह तीन नए कानूनों के माध्यम से औपनिवेशिक सोच से मुक्त, आधुनिक, तकनीक-आधारित और पीड़ित-केंद्रित न्याय प्रणाली की स्थापना की गई है। सामुदायिक पुलिसिंग, अपराध-आधारित पुलिस व्यवस्था, मानवाधिकारों के संरक्षण तथा नागरिक सहभागिता को प्रोत्साहित करने जैसे अनेक कदम इन्हीं विधिक सुधारों के अनुरूप हैं, जिनका उद्देश्य त्वरित न्याय, पारदर्शी जांच और जवाबदेह कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करना है। इन समग्र प्रयासों से न केवल कानून-व्यवस्था सुदृढ़ हो रही है, बल्कि पुलिस और नागरिकों के बीच विश्वास एवं सहयोग का संबंध भी मजबूत हो रहा है।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह कार्यक्रम सकारात्मक संवाद, आपसी सम्मान और सहयोग की संस्कृति को प्रोत्साहित करेगा तथा एक सुरक्षित, समावेशी एवं सशक्त भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा। इस आयोजन से जुड़े सभी आयोजकों एवं सदस्यों को मैं अपनी हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित करता हूं।
श्री अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री, भारत सरकार

मुझे यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि नागरिक अधिकार सुरक्षा परिषद के तत्वावधान में सिटीजन राइट्स प्रोटेक्शन काउंसिल अपने आठवें स्थापना दिवस के अवसर पर मेरा पुलिस-मेरा दोस्त कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।
आशा करता हूँ कि इस प्रकार के आयोजन से संस्था, नागरिकों के बीच पुलिस के प्रति नकारात्मक छवि को दूर करने, समाज में पुलिस की उपयोगिता एवं उनके समर्पण भाव के प्रति जागरूकता तथा मित्रता का माहौल तैयार करने में सफल होगी।
मैं इस आयोजित कार्यक्रम के लिए अपनी हार्दिक शुभकामना प्रेषित करता हूँ।
श्री थावरचंद गहलोत
केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री, भारत सरकार

मुझे यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता है कि नागरिक अधिकार सुरक्षा परिषद, गोंडा (उ.प्र.) मानवाधिकारों, बालश्रम एवं स्त्री-अधिकारों की दिशा में सक्रियता से कार्य करते हुए अपने 8वें स्थापना दिवस के सुअवसर पर नागरिकों एवं पुलिस-प्रशासन के मध्य सहयोग की भावना विकसित करने के उद्देश्य से “मेरा पुलिस – मेरा दोस्त” नामक अभियान आरम्भ करने जा रही है।
नागरिक अधिकारों का इतिहास उतना ही पुराना है जितना कि लोकतंत्र का नागरिक अधिकार शब्द उन जनांदोलनों की देन है जिनके द्वारा विधि के समक्ष समानता के लिए संघर्ष किया गया था। यह जनांदोलन विश्व के अलग-अलग देशों में विभिन्न क्रांतिकारी-जनप्रिय नेताओं के नेतृत्व में लगभग पाँच दशकों तक अलग-अलग रूपों से चलाये गये। कई देशों में इन आंदोलनों की प्रक्रिया दीर्घकालिक, तनावपूर्ण और जटिल भी रही लेकिन लोकतंत्र के इतिहास में यह आंदोलन अत्यधिक महत्वपूर्ण है। हमारा देश विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है, जहाँ नागरिकों को संविधान द्वारा अनेक अधिकार प्रदान किये गए हैं। नागरिकों को दिए गए मौलिक अधिकार संविधान का अनिवार्य भाग है। हमारा संविधान अनुच्छेद 14 से 32 तक समानता का अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार, शोषण के विरुद्ध अधिकार, संस्कृति और शिक्षा का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार एवं नागरिकों द्वारा संवैधानिक उपचार के मौलिक अधिकारों की गारंटी देता है।
अधिकारों के बिना कोई भी नागरिक अपने व्यक्तित्व और आत्मविश्वास को विकसित नहीं कर सकता है। लेकिन जहाँ नागरिकों के मौलिक अधिकार मूल्यवान होते हैं, वहाँ उनके कुछ कर्तव्य भी होते हैं। वास्तव में कर्तव्य पालन से ही अधिकारों का जन्म होता है। दरअसल अधिकार, कर्तव्य और राजधर्म सहचर हैं। हमें ध्यान रखना चाहिए कि बिना कर्तव्य के नागरिक के अधिकार सुरक्षित नहीं रह सकते हैं। नागरिक का जीवन केवल अपने लिए ही नहीं है, अपितु अपने परिवार, अपने नगर, अपने देश तथा मानवता की रक्षा के लिए भी है। हमारी पुलिस इस महती कार्य में हमारी सहायक है। किसी नागरिक के साथ दुर्व्यवहार न हो, उसकी स्वतंत्रता एवं मौलिक अधिकारों का अतिक्रमण न हो, इस कार्य में सर्वप्रथम पुलिस ही राज्य का सशक्त अंग होने के नाते सहायता और संरक्षण देती है। अतः आवश्यकता है कि जनमानस में यह धारणा सशक्त हो कि हमारी पुलिस हमारी सहायक व मित्र है। मुझे प्रसन्नता है कि नागरिक अधिकार सुरक्षा परिषद, गोंडा इस दिशा में सक्रियता से कार्य कर रही है। मैं परिषद के 8वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित करता हूँ।
श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’
केंद्रीय शिक्षा मंत्री, भारत सरकार

मुझे यह जानकर हार्दिक प्रसन्नता हुई है कि नागरिक अधिकार सुरक्षा परिषद के 11वें स्थापना दिवस के अवसर पर ‘पुलिस–जन संवाद दिवस’ कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिक अधिकारों की रक्षा, कानून के प्रति विश्वास और पुलिस तथा समाज के बीच मजबूत संवाद अत्यंत आवश्यक है। पुलिस–जनसंवाद जैसी पहल आपसी समझ, सहयोग और पारदर्शिता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इससे न केवल जनविश्वास सुदृढ़ होता है बल्कि मानवाधिकार संरक्षण, अपराध निवारण और सामुदायिक सुरक्षा के प्रयासों को भी नई दिशा मिलती है।
मुझे आशा है कि इस कार्यक्रम से पुलिस और आमजन के बीच सकारात्मक संवाद को बढ़ाने में मदद मिलेगी तथा यह समाज में शांति, सद्भाव और सुरक्षा के वातावरण को सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध होगा। इस पुनीत आयोजन की सफलता के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएं।
श्री रमेन डेका
महामहिम राज्यपाल, छत्तीसगढ़

यह जानकर प्रसन्नता हुई कि नागरिक अधिकार सुरक्षा परिषद, लखनऊ (उ.प्र.) द्वारा अपना ‘स्थापना दिवस समारोह’ आगामी 31 जनवरी, 2021 को आयोजित किया जा रहा है।
आशा है, संस्था के ‘स्थापना दिवस-समारोह’ में ‘मेरा पुलिस-मेरा दोस्त’ की भावना से अनुप्रेरित होकर उत्कृष्ट सेवा प्रदान करनेवाले पुलिसकर्मियों को सम्मानित करते हुए पुलिस एवं जनता के बीच पारस्परिक सहयोग-भाव को सुदृढ़ करने के सार्थक प्रयास किए जायेंगे।
मैं आयोजन की सफलता हेतु अपनी शुभकामनाएं व्यक्त करता हूँ।
श्री फागू चौहान
महामहिम राज्यपाल, बिहार

नागरिक अधिकार सुरक्षा परिषद, गोंडा को 8वें स्थापना दिवस की शुभकामनाएं।
समाज में शांति एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण निर्माण में पुलिस और नागरिकों की समान भूमिका और उत्तरदायित्व है। संस्था द्वारा नागरिकों और पुलिस में परस्पर सहयोग की भावना जागृत करने के प्रयास सराहनीय है।
आशा है, “मेरा पुलिस-मेरा दोस्त” कार्यक्रम नागरिकों और पुलिस के बीच सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाने में सफल होगा। शुभकामनाएं।
श्रीमती आनंदीबेन पटेल
महामहिम राज्यपाल, मध्यप्रदेश

I extend my warm greetings to the Citizen Rights Protection Council on the occasion of its 11th Foundation Day and the nationwide observance of Police-Jan Samvad Divas.
I appreciate the Council’s sustained contribution over the years in advancing citizen rights awareness and encouraging constructive police-public engagement. I am confident that Police-Jan Samvad Divas will further reinforce cooperation, harmony, and shared responsibility at all levels.
I wish the programme every success and convey my best wishes to all organizers, participants, police personnel, volunteers, and citizens associated with this meaningful initiative.
Shri Kavinder Gupta
Hon’ble Lieutenant Governor, Union Territory of Ladakh

It gives me immense pleasure to learn that the Citizen Rights Protection Council is celebrating its 11th Foundation Day on 31st January 2026. This important milestone reflects the Council’s sustained commitment to strengthening democratic values and promoting awareness of citizen rights. I am confident that this occasion will infuse renewed enthusiasm, dedication, and a deeper sense of purpose among its members as they continue their noble mission.
For peace and progressive development to take firm roots, the safety and security of every citizen must remain paramount. A secure and just society forms the bedrock for education, economic growth, and social harmony. In this shared responsibility, the police play a crucial role. By fostering empathy, openness, and respectful engagement with the public, the police can emerge as trusted partners of the community rather than mere enforcers of the law. Equally important is the trust and cooperation of citizens, who must view the police as guardians of peace and justice. When this mutual confidence is nurtured, it creates a virtuous cycle of trust, cooperation, and effective policing, which is essential for a safe, progressive, and harmonious society. I am pleased to note that, commemorating this Foundation Day, the Citizen Rights Protection Council is organizing a nationwide programme, ‘Police-Jan Samvad Diwas’. I am confident that this meaningful initiative will further strengthen community policing and promote harmony, trust, and constructive dialogue between citizens and the police.
I extend my best wishes to the Citizen Rights Protection Council for the successful conduct of the society-strengthening programme and for a memorable and impactful 11th Foundation Day celebration. Jai Hind.
Lt. Gen. K. T. Parnaik
PVSM, UYSM, YSM (Retd.) Hon’ble Governor, Arunachal Pradesh
